दो बेटियॉ भारत की,
एक एक छोर की,
दूसरी दूसरे छोर की,
एक महान,
दूसरी सबके लिए अनजान,
एक को मिलती है टॉप सिक्योरिटी,
दूसरी को जीरो सिक्योरिटी,
पहली के बारे मैं क्या कहें?
दूसरी की कहानी सुनिए.
गरीब माँ करती है काम,
सुबह से शाम,
तब जुटा पाती है दो वक्त की रोटी,
कैसी पढ़ाई, कैसी लिखाई,
तन ढकने को पूरे कपड़े नहीं,
नोचती हैं गन्दी निगाहें,
माँ रहती है परेशान,
डर लगता है बेटी अकेली है झोपड़ी मैं,
कुछ अनहोना न हो जाए,
और एक दिन हो जाता है,
वही जिसका डर था.
घुस आते हैं झोपड़ी मैं वहशी दरिंदे,
करते हैं वलात्कार,
मार डालते हैं पीट पीट कर,
कोई नहीं सुनता उसका चीत्कार,
कोई नहीं आता बचाने को,
ख़बर छपती है अखबार मैं,
एक दिन बस एक दिन.
फ़िर दूसरी ख़बर,
एक और दूसरी बेटी की.
देश की प्रथम नागरिक महिला,
देश की कर्णधार महिला,
प्रदेश की मुखिया महिला,
और ढेर सारे कानून,
पुलिस की लम्बी कतार,
सब व्यर्थ, सब बेकार.
शास्त्र कहता है,
‘जहाँ होता है नारी का सम्मान,
वहाँ करते हैं देवता निवास’,
मनाया होगा कंचक एक दिन,
की होगी पूजा इन बेटियोँ की,
माँ, बहन, पत्नी ने,
इन वहशी दरिंदों की,
कहाँ पहुंचे हैं हम?
कहाँ पहुंचेंगे हम?
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