काव्य कुञ्ज मैं आपका स्वागत है

By suresh315

हर व्यक्ति के अन्दर एक कवि छिपा होता है. अक्सर वह बाहर निकलता है, कुछ कहता है जिसे कुछ लोग भाषाबद्ध कर लेते है, कुछ अनसुना कर देते हैं. मेरे अन्दर का कवि भी अक्सर बाहर आता है. कुछ कहता है जिसे मैं कभी भाषाबद्ध कर लेता हूँ, कभी अनसुना कर देता हूँ. आपके साथ भी ऐसा ही होता होगा. आइये कहें एक दूसरे से और सुनें एक दूसरे की.

काव्य कुञ्ज मैं आपका स्वागत है
प्रेम करो सबसे, नफरत न करो किसी से

2 Responses to “काव्य कुञ्ज मैं आपका स्वागत है”

  1. Mr WordPress Says:

    धन्यवाद

  2. suresh315 Says:

    स्वागतम.
    आइये काव्य कुञ्ज मैं कविता कीजिये.

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